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पूरा वीडियो: हनुमान चालीसा का वास्तविक अर्थ || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2023)

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00:00तो वो लेटा हुआ है, मस्त मौला फकीर, फकीरों जैसी ही उसकी जोपड़ी, पूर्णिमा है, अपना मस्त अपना देख रहा है चांद को, बड़ा मजा आ रहा है उसको, हिल नहीं रहा है, चोर घुसाता है, तो वहाँ उसको जो भी मिलता है, दो चार बरतन मिले, काज कप�
00:30तो ले ही नहीं जा पारा चोरी करके, जो तो ले जा पारा है, बरतन भाड़ा कपड़े फटे हुए, मेरी टूटी चपले, इन में क्या रखा है, ले जाए सब आज, काश्वर तुझे चांद भी दे पाता

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